बरसते बादल,
गरजते बादल,
एक दूसरे को लतियाते बादल
धकियाते बादल।
ऐसा लगता है
इस बारिश के मौसम में
ऊपर आसमान में
नीचे की राजनीति की आत्मा आ गई हो ।
यहाँ संसद में
हमारे नेता गरजते है
प्रेस कांफ्रेंस में बरसते है।
बस एक अन्तर है
बादल और नेता में।
बादल हमे देते है खूब ढेर सारा पानी
और नेता हमसे लेते है वोट
और सिर्फ़ देते है
टूटी फूटी सड़के और चोट।
ये बादल की तरह थुलथुल हो जाते है
पर कभी फटते नही है
बस हम सर पटकते रहते है।
रविवार, 22 नवंबर 2009
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